What is counter claim in cpc in hindi

what is counter claim in cpc?

सिविल प्रक्रति के मुकदमो मे या कहे तो पैसे जमीन आदी ऐसे सिविल अधिकारो से सम्वन्धित मुकदमो मे Counter Claim के लिए Civil procedure code सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 मे प्रावधान किये गये है।

सिविल प्रक्रिया संहिता मे वताया गया है कि कव वह व्यक्ति जिसके  खिलाफ कोर्ट मे मुकदमा डाला गया है यानी प्रतिवादी कव वादी के खिलाफ Counter Claim जा सकता है।


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A , B पर यह कहते हुए मुकदमा दायर करता है कि B ने A के प्लाट पर जवरदस्ति कव्जा कर लिया है जवकी वह प्लाट मेरा यानी A का है यहॉ प्रतिवादी यानी B यह कहते हुए  Counter Claim लाता है।

कि A का उस प्लाट मे कोई अधिकार नही है और वह A को प्लाट पर कव्जा करने से रोकने के लिए न्यायालय मे Counter Claim ला सकता है।

यहॉ दो वाते महत्वपूर्ण है कि B तव ही A के खिलाफ कोई Counter Claim प्रस्तुत कर सकता है जव A के द्वारा वी के किसी अधिकार को चुनौती दी गई हो। यहॉ B एक नया मुकदमा लाने की जगह A  के द्वारा प्रस्तुत मुकदमे मे ही अपना
Counter Claim दे सकता है या दाखिल कर सकता है। 

Counter claim CPC in hindi

 Counter Claim को सिविल प्रक्रिया संहिता मे प्रस्तुत करने या कहे तो सिविल प्रकिया संहिता को काउन्टर क्लेम के सम्वन्ध मे प्रावधान करने का मुख्य उददेश्य यह था कि अधिक से अधिक मुकदमो मे कमी लाई जा सकती है। 

क्योकि पिछले उदाहरण के आधार पर समझे तो B अपने अधिकार को प्राप्त करने के लिए कोर्ट मे एक नया मुकदमा लाता अगर Counter Claim के सम्बन्ध मे प्रावधान न होता।

तो इस तरह एक ही विवाद के सम्बन्ध मे एक ही व्यक्तियो द्वारा दो मुकदमे प्रस्तुत कर दिये जाते यहॉ Counter Claim के होने से A और B के वीच के विवाद को एक ही मुकदमें के द्वारा निपटाया जा सकता है। 
 

Civil Procedure Code 1908 Oreder 8 Rule 6 (A) in hindi

 आदेश 8 नियम 6 Counter Claim के वारे मे प्रावधान करता है आदेश 8 नियम 6 की मुख्यतः हैडिंग हिन्दी मे कहे तो प्रतिवादी द्वारा प्रतिदावा है। 

जिसमे वताया गया है कि प्रतिवादी वादी के मुकदमे के विरूद्ध या खिलाफ प्रतिवादी के रूप् मे किसी ऐसे अधिकार या दावे को जो वादी के विरूद्ध प्रतिवादी को वाद दायर किये जाने के पूर्व या पश्चात् किन्तू प्रतिवादी द्वारा अपनी प्रतिरक्षा परिदत्त किये जाने से

पूर्व या अपनी प्रतिरक्षा परिदत्त किये जाने के लिये परिसीमित समय का अवशान हो जाने के पूर्व किसी वाद हेतूक के वारे मे प्रोदभूत हूआ हो उठा सकेगा चाहे ऐसा प्रतिदावा नुकसानी के दावे के रूप् मे हो या न हो।

सरल भाषा मे कहें तो Civil Procedure Code 1908 का Order 8 Rule 6 (A) के अनुसार Counter Claim प्रतिवादी यानी जिसके खिलाफ मुकदमा डाला गया है उस व्यक्ति के खिलाफ जो वादी है। 

या जिसने मुकदमा दायर किया है Counter Claim ला सकता है जहॉ प्रतिवादी को वादी के खिलाफ कोई ऐसा वाद हेतू प्राप्त हुआ है। 

चाहे वह मुकदमा दायर होने से पहले प्राप्त हो या वाद मे वह अपने किसी नूकसान या अधिकार के लिए वादी के मुकदमे मे ही अपना Counter Claim ला सकता है।

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