सीपीसी के तहत वादपत्र | Plaint under cpc in hindi

सीपीसी के तहत वादपत्र | Plaint under cpc in hindi

हेलो दोस्तों स्वागत है आपका अपने ब्लॉग ज्ञानी लॉ में आज हम बात करने जा रहे है सीपीसी के तहत वादपत्र-Plaint under cpc in hindi तो बने रहें चलिए जानते है कि वादपत्र क्या होता है।

वादपत्र (Plaint) जिसे अग्रेजी मे हम कहते है असल मे यह वादपत्र (Plaint) शव्द सिविल प्रक्रति के मुकदमे से सम्बन्धित शव्द होता है। 

इस का प्रयोग सिविल प्रक्रति के मुकदमे के सम्बन्ध मे किया जाता है तो आईये समझते है कि 

  1. वादपत्र क्या होता है?
  2. यह कहां काम आता है?
  3.  इसके सम्वन्ध मे कहॉ प्रावधान किया गया है?
Plaint (वादपत्र) In Civil Procedure Code 1908 Hindi | CPC Order-7 Rule-1,2,3,4 in Hindi

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वादपत्र लिखित रूप मे प्रस्तुत वह पत्र होता है जो सिविल प्रक्रति के मुकदमे को दायर करते समय Court मे पेश किया जाता है। 

असल मे यह वादपत्र कोर्ट को यह वताता है कि किस व्यक्ति द्वारा मुकदमा दायर किया गया है और किस व्यक्ति के खिलाफ दायर किया गया है। 

और ऐसे क्या कारण थे जिसकी वजह से कोर्ट मे वादी द्वारा यह मुकदमा फाइल किया गया है वादी वह व्यक्ति होता है। 

जो कार्ट मे किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा लाता है और जिस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दायर किया जाता है उसे हम प्रतिवादी कहते है। 

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सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 Plaint under cpc in hindi के आदेश 7 मे वादपत्र (Plaint) के सम्बन्ध मे वताया गया है तो आईये देखते है।

यह वताता है कि वादपत्र (Plaint) मे किन किन वातो का विवरण दिया जाना आवश्यक है और वादपत्र  तैयार करते समय कौन कौन सी वातो पर ध्यान दिया जाना आवश्यक होता है। 

तो Order-7 Rule-1 की हैंडंग यह है कि वादपत्र (Plaint) मे अन्तर्विष्ट की जाने वाली विशिष्टियां यह वताता है कि वादपत्र (Plaint) मे कौन सी विशिष्टियां किया जाना आवश्यक है।

सीपीसी के तहत वादपत्र | plaint under cpc in hindi

  1.  उस न्यायालय का नाम जिसमे वाद लाया गया है। 
  2.  वादी का नाम, वर्णन और निवास स्थान 
  3. जहा तक अभिनिश्चित किए जा सकें ,प्रतिवादी का नाम ,वर्णन और निवास स्थान 
  4. जहॉ वादी या प्रतिवादी अवयस्क या विकृत चित्त व्यक्ति है वहां उस भाव का कथन 
  5. वे तथ्य जिनमे वाद हेतुक गठित है और वह कव पैदा हुआ। 
  6. यह दशि्त करने वाले तथ्य कि न्यायालय को अधिकारिता है। 
  7. वह अनुतोष जिसका वादी दावा करता है।
  8. जहां वादी ने कोई मुजरा अनुज्ञात किया है या अपने दावे का कोई भाग त्याग दिया है वहां ऐसी अनुज्ञात की गई या त्यागी गई रकम तथा 
  9. अधिकारिता के और न्यायालय फीस के प्रयोजनो के लिए वाद की विषय वस्तु के मूल्य का ऐसा कथन उस मामले मे किया जा सकता है। 

सीपीसी आदेश 7  -order 7 of cpc

तो Order-7 Rule-1 के आधार पर ये सारे विवरण जो उपर दिये गये है वादपत्र मे प्रविष्ट यानी अंकित होना जरूरी होता है। Plaint under cpc in hindi

इसी क्रम मे Order-7 Rule-1 उस सम्वन्ध मे वताता है जव मुकदमा किसी धन यानी रकम के सम्बन्ध मे किया गया हो। 

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कि जहां वादी धन की वसुली चाहता है वहां दावा की गई ठीक रकम वादपत्र मे कथित की जाएगी। 

यानी जितनी रकम के सम्बन्ध मे वादी द्वारा मुकदमा दायर किया गया है उस रकम को भी स्पष्ट रूप से वादपत्र मे अकित करना होगा। 

अव ऐसी स्थति मे जव यह सटिक रूप से वादी को ज्ञात न हो कि प्रतिवादी पर कितनी रकम वसूल हो सकती है तो वह लगभग की मा़त्रा मे रकम का कथन वादपत्र मे करना होगा ।

इसके सम्वन्ध मे नियम 2 प्रावधान करता है कि जहां वादी अन्तःकालीन लाभो के लिए या ऐसी रकम के लिए जो उसके और प्रतिवादी के बीच हिसाव किए जाने पर उसको शोध्य पाई जाए। 

या प्रतिवादी के कब्जे मे की जंगम वस्तुओ के लिए या ऐसे ऋणो के लिए जिनका मूल्य वह युक्तियुक्त तत्परता से भी प्राक्कलित नही कर सकता है। 

वाद लाता है वहां दावाकृत रकम या मूल्य वादपत्र मे लगभग मात्रा मे कथ्ति किया जाएगा। Plaint under cpc in hindi

Order-7 Rule-3 वताता है कि अगर किया गया दावा किसी स्थवर समपत्ति यानी इमूवेवल प्रापरटी के सम्वन्ध मे है। 

यानी जैसे जमीन मकान आदी तव उस सम्पति के सम्बन्ध मे ऐसा विवरण देना आवश्यक होता है। 

जिससे उस सम्पत्ति की पहचान की जा सके जैसे वह सम्पत्ति कहॉ स्थित है उसकी सीमाए क्या है जैसे सम्पत्ति के चारो दिशाओ मे क्या है आदी

यदि सम्पत्ति का विवरण किसी भुलेख मे है तो उसका विवरण ये सारी चीजे आपको वादपत्र. मे वतानी होती है। Plaint under cpc in hindi

इस सम्वन्ध मे Rule-3 की भाषा इस प्रकार है कि जहां वाद की विषय वस्तु स्थावर सम्पत्ति है वहां वादपत्र में सम्पत्ति का ऐसा वर्णन होगा जो दसकी पहचान कराने के लिए पर्याप्त है। 

और उस दशा मे जिसमे ऐसी सम्पत्ति की पहचान भू व्यवस्थापन या सर्वेक्षण संबंधी अभिलेख मे की सीमाओ या संख्यांको द्वारा की जा सकती है वादपत्र मे ऐसी सीमाए या संख्यांक विनिर्दिष्ट होंगे।

अव वात करते है Order-7 Rule-4 की तो नियम 4 वताता है कि जव वादी द्वारा वाद प्रतिनिधि की हैसियत से प्रस्तूत किया जाता है। 

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तव वहां वादी को वादपत्र मे यह विवरण देना होता है कि वाद की विषय वस्तू मे उसका वास्तविक हित है।

और उसके द्वारा वाद मे प्रतिनिधि के रूप मे प्रस्तुत होने से पहले सभी आवश्यक कदम मुकदमे मे प्रतिनिधि वनने के सम्बन्ध मे उठाये जा चुके है। 

इस आधार पर आदेश 4 की भाषा इस प्रकार है कि जहां वादी प्रतिनिधि की हैसियत मे वाद लाता है वहां वादपत्र मे न केवल यह दर्शित होगा। 

 वादपत्र  क्या है | what is plaint in cpc hindi

कि उसका विषय वस्तु मे वास्तविक विघमान हित है वरन् यह भी दर्शित होगा कि उससे सम्पृक्त वाद के संस्थित करने के लिए उसको समर्थ् वनाने के लिए आवश्यक कदम वह उठा चुका है।

Order-7 Rule-5 यह वताता है कि प्रतिवादीयो यानी जिन व्यक्तियो के खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है उनके सम्वन्ध मे भी यह विवरण वादपत्र मे देना आवश्यक होता है। 

कि प्रतिवादी का उस वाद की विषय वस्तू मे क्या हित है या प्रतिवादी ऐसी विषय वस्तु मे अपने हित का दावा करता है और यह भी विवरण देना होता है। 

कि वह उक्त वादपत्र के सम्वन्ध मे वादी की मांग के सम्वन्ध मे उत्तर देने के लिए दायी है। 

अतः नियम 5 की भाषा निम्न प्रकार है कि वादपत्र मे यह दर्शित किया जाएगा कि प्रतिवादी विषय वस्तू मे हित रखता है। 

या रखने का दावा करता है और वह वादी की मांग का उत्तर देने के लिए अपेक्षित किए जाने का दायी है। Plaint under cpc in hindi

आदेश 7 मे वादपत्र से सम्वन्धित 13 नियमो का वर्णन है लेकिन सभी का विस्तार पूर्वक वर्णन एक ही व्लौग मे सम्भव नही है। 

तो आज हमने जाना की वादमत्र क्या होता है और मुख्यतः इसे तैयार करते समय किन वातो का ध्यान रखा जाता है और वादपत्र मे किन वातो के सम्बन्ध विवरण देना आवश्यक होता है।

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