धारा 24 वाद कालीन भरण पोषण कार्यवाही के खर्चे

धारा 24 वाद कालीन भरण पोषण कार्यवाही के खर्चे

वाद कालीन भरण पोषण कार्यवाही के खर्चे 
 
Hindu Marrage Act Section-24 धारा 24 वाद कालीन भरण पोषण कार्यवाही के खर्चे के वारे मे वताती है कि कव एक पक्ष चाहे पति हो 
 
या पत्नी दूसरे पक्ष से मुकदमे मे हाने वाले खर्चो और मुकदमा चलते समय अपने स्वम के जीवन को चलाने के लिए होने वाले खर्चो को प्राप्त कर सकता है।

यहॉ वाद कालीन भरण पोषण का मतलब उन खर्चो या भरण पोषण से है। जो मुकदमा चलते समय अपने जीवन को चलाने के लिए दूसरे पक्षकार से कोर्ट के द्वारा वसूल किए जा सकते है।
 
दूसरे कार्यवाही के खर्चो से मतलब उन खर्चो से है जो दूसरे पक्षकार के विरूध मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक होते है

Section-24 of Hindu marriage Act in Hindi

Hindu Marriage Act Section-24 पति या पत्नी को उस स्थिति मे दूसरे पक्षकार से वाद कालीन भरण पोषण या कार्यवाही के खर्चे दिलाने का प्रवन्ध करती है
 
जव पत्नी की अपनी स्ंवम की स्वतऩ्त्र आय (Indiviual Income) इतनी न हो कि वह दूसरे पक्षकार से मुकदमा लडते समय अपना जीवन यापन चला सके। 
 
या मुकदमे मे होेेने वाले खर्चो को वहन कर सके तव कोर्ट ऐसे पक्षकार के आवेदन पर दूसरे पक्षकार को यह आदेश दे सकता है
 
कि वह अपनी आय मे से कुछ हिस्सा ऐसे पक्षकार को दे जो अपना जीवन यापन कर पाने मे अस्मर्थ है

Hindu Marriage Act Section-24

यहॉ कोई भी आदेश भरण पोषण देने वाले व्यक्ति या पक्षकार की आय को ध्यान मे रखकर दिया जाएगा
 
यानी ऐसा नही किया जा सकता की किसी व्यक्ति या पक्षकार की र्स्ंवम की आय (Income) 10000 रू हो और ऐसे व्यक्ति या पक्षकार को 15000 रू भरण पोषण देने का आदेश नही दिया जा सकता है 
 
यानी उस व्यक्ति की आय से उतना ही धन वसूला जा सकता है जितना की भरण पोषण देने वाले व्यक्ति का जीवन यापन अत्यधिक प्रभावित न हो और यहॉ कोर्ट ऐसा आदेश दे सकता है
 
 कि वह व्यक्ति जो भरण पोषण दे रहा है वह दूसरे पक्षकार को प्रत्येक महीने ऐसा भरण पोषण जव तक दे जव तक की मुकदमे की कार्यवाही समाप्त नही हो जाती। 
 
इस प्रकार वह मुकदमे की कार्यवाही के दौरान भरण पोषण देता रहेगा 
 
Hindu Marriage Act Section-24 इसी सम्बन्ध मे यह भी प्रावधान करती है कि इस प्रकार भरण पोषण प्राप्त करने के लिए किया गया कोई भी आवेदन दूसरे पक्षकार को सूचना प्राप्त होने के वाद 60 दिन के अन्दर कोर्ट द्वारा ऐसे आवेदन का निस्तारण किया जाएगा
 
यहॉ पत्नी द्वारा इस प्रकार भरण पोषण प्राप्त करते हुए यह नही समझा जाएगा की ऐसे भरण पोषण के सम्वन्ध मे प्रावधान अकेले पत्नी के लिए ही लागू होता है ।
 
जयवीर कौर सहगल VS डिस्ट्रिक जज देहरादून 

इस मामले मे पत्नी अपनी सवसे वडी अविवाहित पुत्री का भी भरण पोषण कर रही थी इस लिए भरण पोषण का दावा करने के लिए उसके अधिकार मे अपना भरण पोषण व पुत्री का भरण पोषण भी शामिल होगा।

Section-24 of hindu marriage act judgements in favour of wife

हिमाचल प्रदेश 33 पेज 35 धारा 24 के अन्तर्गत किये गये किसी भी आवेदन को इस आधार पर इन्कार नही किया जा सकता है कि पत्नी का भरण पोषण उसके माता पिता द्वारा किया जा रहा है 
 
यानी यह कहना कि पत्नी का भरण पोषण उसके माता पिता द्वारा किया जा रहा है। अन्तरिम भरण पोषण से इन्कार करने के लिए कोई आधार नही है। 

जहॉ पत्नी की अपनी स्वतन्त्र आय इतनी है। कि वह आसानी से अपना जीवन यापन कर सके वहा पत्नी अन्तरिम भरण पोषण पाने की अधिकारी नही होगी।
 
दन्याल साहू VS सुजाता साहू AIR 2012
 
दन्याल साहू व सुजाता साहू के मामले मे पत्नी ने स्वंम के लिए और अपने 5 वर्ष के पुत्र के लिए भरण पोषण का आवेदन किया था पाया गया
 
कि पत्नी का व्यवसायिक कार्य था और वह प्रतिमाह 19000 रू प्राप्त कर रही थी । तो कोर्ट ने यह कहते हुए कि पत्नी किसी भरण पोषण को प्राप्त करने की हकदार नही है
 
परन्तू क्योकि उसका 5 वर्ष का पुत्र स्कुल जाने वाला वालक था जिसके भरण पोषण के लिए न्यायालय ने 6000 रू प्रतिमाह र्निधारित किया।
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