Section 121 IPC (India Panel Code) | भारतीय दण्ड संहिता धारा-121

Section 121 IPC (India Panel Code)| भारतीय दण्ड संहिता धारा-121

हेलो दोस्तों,

आज हम बात करने वाले है Section 121 IPC (India Panel Code) | भारतीय दण्ड संहिता धारा-121 की आज हम जानेंगे की Section 121 IPC क्या है और यह क्या प्रावधान करती है तो चलिए सुरु करते है।
 
धारा-121 (Section 121 IPC) के तहत जो कोई सरकार के विरुद्ध युद्ध करेगा , या करने का प्रयाश करेगा या ऐसा युद्ध करने का दुष्प्रेरणा करेगा , या ऐसा युद्ध करने का प्रत्यन करेगा या ऐसा युद्ध करने का दुष्प्रेरणा करेगा , बह मृत्यु या आजीवन कारावास से दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डित होगा। 

प्रत्येक राज्य को अपने को सुरक्षित रखने का उसी प्रकार अधिकार है जैसे कि उसकी प्रजा को तथा मनुष्यो की तरह राज्य भी अपने अस्तित्व को बनाये रखने तथा सुरक्षित रखने के लिए आदिकाल से ही उपाय करते चले आ रहे है। 

कॉमन लॉ में राजद्रोह (Treason) के अपराध को इसी तथ्य विचार में रखकर सृजित किया गया था। 

घोर राजद्रोह (High Treason) की मूलभूत विसेसता यह है कि इसमें शासक को राज्य का सर्वोच्च पदाधिकारी होने के नाते जिस विश्वास एवं समर्थन की अपने प्रजा से अपेक्षा  है। बह समाप्त हो जाती है। 

इस अपराध को गठित करने के लिए व्यक्तियों कीकिसी विशिष्ट संख्या की आवश्यकता नहीं पड़ती।

इसी प्रकार इस अपराध को गठित करने के लिए व्यक्तियों को किसी विशिष्ट ढंग से इखट्टा होना या हतियार एकत्रित करना भी आवश्यक नहीं है।

इसका प्रमुख परीक्षण (Test) यह है कि किस प्रयोजना अथवा किस आशय से वे लोग इखट्टा होते है। 

उस समूह का प्रयोजन निश्चयत:  बल अथवा हिंसा के प्रयोग द्वारा सामान्य लोक प्रकृति (General Public Nature) के किसी उद्देश्य को प्राप्त करना तथा सरकार के प्रभुत्व पर प्रत्यक्षत: प्रहार करना होना चाहिए। 

Section 121 ipc in hindi

वयव - इस धारा के निम्नलिखित अवयव है। 

  1. अभियुक्त ने युद्ध किया या युद्ध करने का दुष्प्रेरणा किया , तथा 
  2. ऐसा युद्ध भारत सरकार के विरुद्ध था।

युद्ध करना (Waging War) - कोई व्यक्ति जो सांविधानिक प्राधिकारियों पर हुए संगठित सशस्त्र आक्रमण में भाग लेता है तथा आक्रमण का उद्देश्य सरकार को विध्वंस कर उसके स्थान पर दूसरे को संस्थापित करना है तो बह व्यक्ति युध्य करने के अपराध का दोषी होगा। 

यह अपराध किसी नागरिकता द्वारा या विदेशी द्वारा किया जा  सकता है। प्रत्येक व्यक्ति अपने राजनीतिक विचारो के विस्तारण एवं संस्थापन के लिए तब तक स्वतन्त्र है जब तक बह बल या हिंसा का प्रयोग नहीं करता है। 

पाजनीतिक प्रणाली में अथवा सरकार की प्रकृति में शांतिपूर्ण साधनो द्वारा परिवर्तन के लिए प्रयत्न करना युद्ध करने से समतुल्य नहीं है। 

किन्तु यदि सरकार को उखाड़ फेकने के उद्देश्य से व्यक्तियों का चयन करता है तथा जो उसका साथ नहीं देते है। उन्हें दण्डित  है तो , युद्ध करने का दोषी होगा।

मगन लाल राधा कृष्ण VS इम्परर में इस अपराध के निम्नलिखित गुड़ बताये गए है। 

  1. इस अपराध को गठित करने के लिए व्यक्तियों की किसी विशिष्ट संख्या की आवश्यकता नहीं  होती है।
  2. सम्बन्धित व्यक्तियों की संख्या तथा उसके सुसज्जित होने की प्रकृति महत्वहीन है। 
  3. वास्तविक परीक्षण यह है कि "किस आशय "  से वे एकत्रित हुए है 
  4. जमघट (Gathering) का उद्देश्य बल और हिंसा के प्रयोग द्वारा किसी सामान्य लोक प्रकृति के उद्देश्य की प्राप्ति और शासक के प्राधिकारों को प्रभाबित करना होना चाहिए। 
  5. मुख्य कर्ता तथा सहायक कर्ता में कोई अंतर नहीं है। जो कोई भी अवैध कार्य में भाग लेता है उसी अपराध का दोसी होगा। 
युद्ध करने का आशय है युध्य में सामान्यतया प्रयुक्त रीतियों द्वारा युध्य करना।
 
इस धारा-121 (Section 121 IPC) के अधीन किसी व्यक्ति को दण्डित करने के लिए केबल यह दर्शाना ही पर्याप्त नहीं है कि अभियुक्त ने शस्त्रागार (Armoury) को अपने कब्जे लेने के लिए छल  किया था
 
और जब उसे समर्पण करने के लिए कहा गया तो उसने छल द्वारा प्राप्त बंदूकों और अन्य युद्धोपकरणों (Ammunitions) का प्रयोग सरकारी फौजो के विरुद्ध किया ,अपितु यह भी दर्शाना आवश्यक है कि शस्त्रागार का छिना जाना भी सुनियोजित योजना का अंग था।
 
सरकारी फौजो को प्रतिरोध देते समय उनका आशय था कि उन्हें आश्चर्य में दाल कर पराजित कर दिया जाये ,तत्पश्चात सभी सरकारी प्रतिरोधी को कुचल कर या तो उसके नेता शासन की बागडोर अपने हाथ में ले लें या शासन उसकी मांगो के सम्मुख झुक जाये।
 
सरकारी फौजो पर जानबूझकर एवं संगठित रूप में किया गया आक्रमण युद्ध के समतुल्य होगा यदि विद्रोहियों का उद्देश्य सशस्त्र सेना एवं द्वारा लोक-सेवको को अपने आधिपत्य में करना तथा सामान्य टेक्स बसूली को स्थगित करना हो। 

Section 121 of indian panel code

युद्ध करने का दुष्प्रेरणा करता है (Abests the Waging of War) - युद्ध करने का दुष्प्रेरणा धारा-121 (Section 121 IPC) के अंतर्गत एक विशिष्ट अपराध घोसित किया गया है। 
 
यह आवश्यक नहीं है की दुष्प्रेरणा के फलस्वरूप ही युद्ध हो। यघपि दुष्प्रेरणा से सम्बंधित सामान्य विधि दंड के प्रयोजन हेतु सफल  दुष्प्रेरणा तथा कर्ता में भी कोई अंतर नहीं है और वे सभी व्यक्ति जो अवैध कार्यवाही में भाग लेते है एक ही दंड से दण्डित होंगे। 
 
जब कोई व्यक्ति केवल विचारो को भड़काने अथवा उत्तेजित करने का। प्रयत्न करता है तब तक बह राजद्रोह (Sedition) के अतिरिक्त किसी अन्य अपराध का दोषी नही होगा। 

कोई व्यक्ति उकसाने तथा युद्ध करने के दुष्प्रेरणा का दोषी तभी माना जायेगा जब बह स्पष्टत: एवं निश्चयत: किसी कार्यवाही को उकसाता है। 
 
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उदहारण के लिए

गणेश डी सावरकर के बाद में अभियुक्त ने कबिताओ की एक किताब प्रकाशित की जिसमे सरकार एवं "श्वेत" शासको के विरुद्ध प्रत्येक कबिता में रक्त पिपासा एवं घातक उत्कंठाओं को प्रेरित किया गया था।
 
हथियार धारण करने के लिए असंदिग्ध भाषा में विचार प्रतिपादित किया गाया था तथा गुप्त संस्थाओ के निर्माण और विदेशी शासन को जड़ से समाप्त करने के लिए गुरिल्ला युद्ध को अपनाने के लिए सुझाव दिया गया था। 

यह निर्णय दिया गया की कबिताये पाठको  को युद्ध करने के लिए उकसाने हेतु सक्षम थी और अभियुक्त  युद्ध करने के दुष्प्रेरणा का दोषी था। 
 
121- क.  धारा 121 (Section 121 IPC) द्वारा दण्डनीय अपराधों की करने का षड्यंत्र -

जो कोई धारा-121 (Section 121 IPC) द्वारा दण्डनीय अपराधों में से कोई अपराध करने के लिए भारत के भीतर या बहार षड्यंत्र करेगा , या केंद्रीय सरकार को या 
 
किसी राज्य की सरकार को आपराधिक बल द्वारा या आपराधिक बल के प्रदशन द्वारा आतंकित करने का षड्यंत्र करेगा , बह आजीवन कारावास से या दोनों में से किसी भांति के कारावास से , जिसकी अवधि 10 बर्ष तक की हो सकेगी , दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डिनीय होगा। 

ipc section 121 in hindi

धारा - 121 (Section 121 IPC) के अधीन षड्यंत्र गथित होने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि उसके अनुसरण में कोई कार्य या अवैध लोप घटित हुआ हो। 

अवयव-  धारा - 121 (Section 121 IPC) दो प्रकार के षडयंत्रो से सम्बंधित है -
  1. धारा-121 (Section 121 IPC) द्वारा दण्डनीय किसी अपराधी को करने के लिए भारत में अथवा भारत के बाहर षड्यंत्र करना एवं ,
  2. आपराधिक बल द्वारा अथवा आपराधिक बल के प्रदशन द्वारा केंद्रीय सरकार अथवा किसी राज्य सरकार को आतंकित करने हेतु षड्यंत्र करना। 
धारा - 121 (Section 121 IPC) में प्रयुक्त शब्दों "आपराधिक बल द्वारा अथवा आपराधिक बल के प्रदशन द्वारा केंद्रीय सरकार अथवा किसी राज्य सरकार को आतंकित करने का षड्यंत्र करते है " से पूर्णतया स्पष्ट है। 
 
कि इसमें केबल सामान्य विद्रोह (Insurrection) को सूचित करने के लिए षड्यंत्र ही नहीं अपितु , केंद्रीय सरकार अथवा राज्य सरकार को आतंकित करने के लिए घातक बलवा (Serious Riot) या एक विशाल एवं उपद्रवी अवैध सभा भी सम्मिलित है। 
  
"आतंकित करेंगा" शब्द से आशय है आशंका , या संत्रास या भय के सृजन से कुछ और अधिक यह उस परिस्थिति के सृजन को इंगित है जिसमे केंद्रीय अथवा प्रांतीय सरकार बल के सम्मुख झुकने अथवा स्वंय को या जनता को घोर परिणामो में सम्मुख अभिदर्शित  करने के बीच चयन करने में अपने को असमर्थ पाती है। 
 
यह आवश्यक नहीं है कि खतरा उनकी हत्या या उन्हें शारीरिक क्षति का खतरा हो। खतरा लोक संपत्ति को या सामान्य जनता की सुरक्षा को भी हो सकता है। 
 
सरकार की प्रकृति में परिवर्तन लाने के प्रयोजन से किया गया कोई षड्यंत्र भले ही बह इस सहिंता की किसी अन्य धारा के अंतर्गत कोई अपराध  गठित करता हो। 
 
इस धारा के अंतर्गत तब-तक अपराध  नहीं होगा जब-तक की बह आपराधिक बल अथवा आपराधिक बल के प्रदर्शन द्वारा सरकार को आतंकित करने के लिए एक षड्यंत्र न हो। 
 
"आपराधिक बल द्वारा अथवा आपराधिक बल के प्रदशन द्वारा केंद्रीय सरकार अथवा किसी राज्य सरकार को आतंकित करने का षड्यंत्र " की व्याख्या केरल उच्च न्यायालय ने 

अरविन्द VS राज्य के बाद में किया था। उच्च न्यायालय ने कहा कि " आतंकित करना " शब्द से यह स्पष्ट होता है कि इसमें डर , घबराहट या भय उत्त्पन्न करना मात्र ही नहीं कुछ अधिक निहित है। 
 
यह उस स्थिति के सृजन को इंगित करता है जिसमे सरकार , बल के समक्ष झुकने या सरकार  या जनसामान्य के समक्ष बहुत गंभीर खतरा उत्पन्न होने , के बीच चुनने को वाध्य हो जाती है। 
 
अतः केवल इस नारा देने मात्र से कि सशस्त्र क्रांति के द्वारा सरकार बदली जा सकती है , यह अभिप्रेत नहीं है कि आपराधिक बल द्वारा सरकार बदलने के लिए आपराधिक षड्यंत्र का अपराध किया जा चुका है
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