Life Imprisonment आजीवन कारवास | Section 53 IPC in hindi

Life Imprisonment आजीवन कारवास | Section 53 IPC in hindi

आजीवन कारवास (Life Imprisonment) और Section 53 IPC in hindi  साधारण भाषा में आजीवन का अर्थ है , अभियुक्त की स्वाभाविक आयु की सम्पूर्ण अविशिष्ट समय के लिए सजा। 
  
अनेक राज्यों के जेल मैनुअल आजीवन कारावास (Life Imprisonment) को एक निश्चित समय के लिए ही मानते है। 
Life Imprisonment आजीवन कारवास | Section 53 IPC in hindi
Life Imprisonment आजीवन कारवास
 परन्तु किसी समुचित सरकार के छूट Remission के विना आजीवन कारवास (Life Imprisonment) किसी निश्चित समय के लिए नहीं माना जा सकता। 

इस विचार को उच्चतम न्यायालय ने मध्य प्रदेश राज्य Vs रतन सिंह तथा अव्दुल आजाद Vs राज्य में व्यक्त किया था।

अब्दुल आजाद के वाद में यह कहा गया कि यदि सरकार द्वारा दण्ड की मात्रा में कोई छूट प्रदान की जाती है तो अभियुक्त उसका लाभ उठाने का अधिकार है।

अनेक निर्णयों एवं उपबन्धों का अवलोकन करने के पश्चात निम्नलिखित सिद्धांतो को प्रतिपादित किया जा सकता है -

1. आजीवन कारावास (Life Imprisonment) का अर्थ है , अभियुक्त के सम्पूर्ण अविशिष्ट जीवन के लिए सजा जब की की सजा में पूर्णतः आशिंक  रूप में समुचित सरकार द्वारा छूट नहीं दे दी जाती आजीवन की सजा 20 साल की अवधि बीतने पर स्वत: समाप्त नहीं हो जाती 

2. जिस राज्य में अभियुक्त को दोषी सिद्ध किया गया है तथा उससे सजा दी गयी है केबल बही सजा को कम कर सकता है। 
 
3. जेल अधिनयम या जेल मैनुअल के अंतर्गत बनाये गए नियमो के अधीन सजा में छूट देना मात्र प्रशासकीय निर्देश है जो जेलों और कैदियों के प्रशासन के लिए बनाये गए है।

जाहिद हुसैन Vs पश्चिम बंगाल राज्य 

जाहिद हुसैन के मामले में उच्चतम ने पूर्ण घोसित मत का पुनः प्रतिपादन करते हुए निर्णीत किया 

कि आजीवन कारावास (Life Imprisonment) के दण्ड का परिहार Remission को शामिल करते हुए 20 बर्ष की कारावास अवधि समाप्त होने के पश्चात् स्वयंमेव अंत नहीं हो जाता है। 

क्योंकि आजीवन कारावास (Life Imprisonment) का अर्थ होता है बंदी के सम्पूर्ण  जीवन का कारावास जब तक की समुचित सरकार दण्ड का सम्पूर्ण या आंशिक परिहार करने को अपनी विवेक शक्ति का प्रयोग नहीं करती है।

बिशन सिंह तथा अन्य Vs पंजाब राज्य

बिशन सिंह के मामले में यह निर्णय दिया गया कि यदि हत्या का प्रकरण ऐसा है  जिसे अपूर्व में अपूर्वतम की संज्ञा नहीं दी जा सकती है , 

तो मृत्यु दण्ड की सजा को आजीवन कारावास (Life Imprisonment) की सजा में परिवर्तित किया जा सकता है। 

जहा अभियुक्त किसी विशेष परिस्थिति , जैसे गरीबी के कारण घृणित किस्म की हत्या करता है , उसे मृत्यु दण्ड से दण्डित नहीं किया जायेगा। 

उत्तर प्रदेश राज्य Vs एम के अन्थोनी 

इस मामले में अभियुक्त ने पहले अपनी पत्नी की हत्या की , क्युकी उसके पास साधन नहीं था की बह अपनी बीमार पत्नी की दवा करा सके। 

तदुपरांत अपने दो बच्चो की हत्या की , क्योंकि पत्नी की मृत्यु के बाद उनकी कोई देखभाल करने वाला नहीं था। 

उच्चतम न्यायालय ने यह मत व्यक्त किया की चूँकि अभियुक्त ने हत्या गरीबी के कारण की थी , बदले , लाभ , या लालच की भावना से नहीं 
 
अतः उससे आजीवन कारावास (Life Imprisonment) के दण्ड से दण्डित किया गया , मृत्यु के दण्ड से नहीं।  

 

Life Imprisonment in india

उचित दण्ड देना - गुरुमुख सिंह Vs हरयाणा राज्य

इस मामले में यह अभिनिर्धारित गया कि किसी अभियुक्त पर उचित और उपुक्त दण्ड आरोपण करना न्यायालय  परिबद्ध दायित्व  और कर्त्तव्य है।

न्यायालय को यह निश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि अभियुक्त को उपयुक्त दण्ड मिले। दूसरे शब्दों में दण्ड की मात्रा अपराध की गंभीरता के अनुरूप होना चाहिए।

निर्वासन के प्रति निर्देश का अर्थ लगाना -

 1 . उपधारा   2 .  के और उपधारा  3 .  के उपबंधों के अध्यधीन किसी अन्य तत्तसमय प्रवृत्त विधि में , या किसी ऐसी विधि या  किसी निरसित अधिनियमित के आधार पर प्रभावशाली किसी लिखित या आदेश में

"आजीवन निर्वासन " के प्रति निर्देश का अर्थ यह लगाया जायेगा के बह " आजीवन कारावास " (Life Imprisonment) के प्रति निर्देश है। 

2 . हर मामले में , जिसमे की ऐसी अवधि के लिए निर्वासन का दंडादेश दण्ड प्रक्रिया सहिंता (संशोधन) अधिनियम , 1955 (1955 का 26 ) के प्रारम्भ से पूर्व दिया गया है। अपराधी से उसी प्रकार बरता जायेगा , मानो बह उसी अवधि के लिए कठिन कारावास के लिए दण्डादिष्ट किया गया हो।

3 .  किसी अन्य तत्समय प्रवृत विधि में किसी अवधि के लिए निर्वासन या किसी लघुतर अवधि के लिए निर्वासन के प्रति (चाहे उसे कोई कोई या हो ) कोई निर्देश लुप्त कर दिया समझा जायेगा। 

4 किसी अन्य तत्समय प्रवृत विधि में निर्वासन के प्रति जो कोई निर्देश हो -

          1. यदि उस पद से आजीवन निर्वासन अभिप्रेत है , तो उसका अर्थ आजीवन कारावास (Life      Imprisonment) के प्रति निर्देश होना लगाया जायेगा ;
 
         2. यदि उस पद से किसी लघुतर अवधि के लिए निर्वासन अभिप्रेत है , तो यह समझा जायेगा।  कि बह लुप्त कर दिया गया है।
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