चेक बाउंस क्या होता है पूरी जानकारी

चेक बाउंस क्या होता है पूरी जानकारी

नमस्कार दोस्तो आज हम वात करेगे

यानी चैक अनादरण की जिसे हम आम भाषा मे चैक वाउन्स होना भी कहते है आज हम जानेगे की चेक बाउंस क्या होता है  क्या होता है।

किन किन परिस्थितियो मे वैक द्वारा चैक को डिस्ओनर किया जा सकता है और यदि कोई चैक डिस्ओनर हो गया है तो आप क्या उपाय कर सकते है। 

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चेक बाउंस क्या होता है
इसी के साथ हम जानेगे की चैक डिस्ओनर के सम्बन्ध मे कानून क्या प्रावधान करता है और उन प्रावधानो का प्रयोग आप किन परिस्थितियो मे और कैसे कर सकते है।

चैक डिस्ओनर चेक बाउंस क्या होता है  या चैक वाउन्स इस शब्द को आपने कभी न कभी जरूर सुना होगा। असल मे चैक डिसओनर होने का मतलव यह है। कि जव आप कोई चैक वैंक मे पेमेन्ट निकालने के लिए लगाते है।

और वैक किसी कारण से आप के चैक को विना पेमेन्ट किये एक रिर्टन मैमो के साथ वापस कर देती है तव इस तरह वापस किये गये चैक को वाउन्सड चैक कहते है। वैक कई कारणो की वजह से आपके चैक को वाउन्स कर सकती है। 

जैसे जिस व्यक्ति ने आपको अपने वैक अकाउन्ट का चैक दिया है उसके वैक अकाउन्ट मे उतने पैसे ही न हो जितना कि उसने अपने चैक मे लिखा है।

तव ऐसे मे वैक इन सफीसेन्ट वैलेन्स हाने के कारण आपके चैक को डिस्ओनर Dishonour of cheque कर सकती है इसी के साथ यदि चैक पर किए गये हस्ताक्षर अकाउन्ट होल्डर के हस्ताक्षर से मैच नही करते है।

तव भी वैक ऐसे मे आपके चैक को वाउन्स कर सकती है इसके अलावा यदि अकाउन्ट क्लोज कर दिया गया है या अकाउन्ट होल्डर द्वारा वैक को यह निर्देश दिए गये है कि उसके अकाउन्ट से कोई भी पेमेन्ट चैक के द्वारा न किया जाये तो ऐसे मे वैक आपके द्वारा लगाये गये चैक को वाउन्स कर सकती है ।

चेक बाउंस के कारण

इसके अलावा और भी कई कारण चैक वाउन्स होने के हो सकते है लेकिन यहाॅ वैक चैक को वाउन्स करने के वाद चैक जमा करने वाले व्यक्ति को ओरिजनल चैक वापस कर देती है और उसके साथ एक रिर्टन मैमो भी देती है 

जिसमे आपका चैक किस कारण से वैक द्वारा वाउन्स किया गया है लिखित रूप् मे दिया होता है ।

मान लिजिए कि A आपको किसी पेमेन्ट के एवज मे 1 लाख रूपये का चैक देता है लेकिन जव आप उस चैक को अपने अकाउन्ट मे पैसे निकालने के लिए जमा करते है।

और वैक एक रिर्टन मेमो के साथ आपको यह कहते हुए चैक वापस कर देती है कि A के अकाउन्ट मे चैक मे दी गई  धनराशी जितना अमाउन्ट नही है ओैर आपका चैक वाउन्स हो जाता है।

तो ऐसे मे एन आइ एक्ट 1881 की धारा 138 आपको प्रोटेक्शन प्रदान करती है और धारा 138 मे दिए गये नियमो के आधार पर आप A के खिलाफ कोर्ट मे केस फाइल कर सकते है

लेकिन धारा 138 के प्रावधानो के आधार पर कम्पलेन्ट फाइल करने से पहले आपको चैक वाउन्स होने के 30 दिनो के भीतर लिखित रूप मे ए को एक लीगल नोटिस देना होगा।

जिसके द्वारा A को यह सूचना दी जाएगी कि आपके द्वारा दिया गया चैक वैक द्वारा वाउन्स कर दिया गया है अगर आप नोटिस मिल जाने के 15 दिन के भीतर मेरा पैसा नही देते है तो आपके खिलाफ कोर्ट मे केस दायर किया जाएगा।

यहाॅ अगर A नोटिस मिल जाने के 15 दिन के भीतर आपका पैसा वापस कर देता है तो A के खिलाफ कोर्ट मे कोई केस फाइल नही किया जा सकता है और अगर A नोटिस मिल जाने के 15 दिन के भीतर आपका पैसा वापस नही करता है।

तो आप एन आई एक्ट की धारा 138 के आधार पर कोर्ट मे A के खिलाफ कम्पलेन्ट यानी परिवाद दायर कर सकते है इस तरह की कम्पलेन्ट फाइल करने से पहले कुछ कन्डीशन को पूरा करना वहुत आवश्यक होता है जो कि निम्न प्रकार है।

  1. कम्पलेन्ट फाइल करने के लिए यह जरूरी है कि आपने वह चैक वैक मे समय से जमा किया हो अमूमन चैक 3 महीने के लिए ही वैलिड होते है कुछ स्थितियो मे यह समय 6 महीने भी हो सकता है तो ऐसे मे यह जरूरी है कि आपके द्वारा वह चैक वैक मे समय अवधी के भीतर जमा किया गया हो।
  2. आपका चैक वैक द्वारा वाउन्स कर दिया गया हो।
  3. चैक वाउन्स होने के वाद आपके द्वारा चैक वाउन्स हाने की डेट से 30 दिनो के भीतर एक लीगल नोटिस जिसने आपको चैक दिया था को दिया गया हो।
  4. नोटिस मिलने के 15 दिन वाद भी चैक मे लिखी धनराशी आपको प्राप्त न हुयी हो।

तव इन सारी कन्डीशन के पूरा हो जाने के वाद आप कोर्ट मे केस फाइल कर सकते है यह केस कम्पलेन्ड के रूप मे जिले के फस्ट क्लास मजिस्ट्रेट के यहाॅ फाइल किया जाता है और इस तरह की कम्पलेन्ट फाइल करने के लिए निचे दिये गये कुछ दस्तावेजो की जरूरत पडती है जो कि निम्न प्रकार है 

  1. ओरिजनल चैक 
  2. वैक द्वारा दिया गया रिर्टन मैमो 
  3. डिमान्ड नोटिस 
  4. पोस्टल रिसीप्ट 
  5. आधार कार्ड 
  6. आपका एक पास्पोर्ट साइज फोटो

इन सभी दस्तावेजो केा कोर्ट मे कम्पलेंट के साथ जमा करना होता है इस तरह की कम्पलेन्ट कोर्ट मे फाइल हो जाने के वाद फस्टली अगर कोर्ट को यह लगता है

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चेक बाउंस होने के कारण

कि अभियुक्त यानी जिसके खिलाफ कोर्ट मे केस फाइल किया गया है के विरूद्व मामला वनना प्रतित होता है तो ऐसे मे कोर्ट उस व्यक्ति को सम्मन Summons जारी कर देती है।

और अगर सम्मन Summons मिल जाने के वाद भी वह व्यक्ति कोर्ट मे हाजिर नही होता है तो कोर्ट ऐसे मे वेलेवल वारन्ट Bailable Warrant जारी कर देेती है।

और यदि वह तव भी कोर्ट मे हाजिर नही होता है तो कोर्ट उसके खिलाफ गिरफतारी वारन्ट Arrest Warrant जारी कर देती है और पुलिस को यह आदेश देती है कि वह उस व्यक्ति को गिरफतार कर कोर्ट मे उपस्थित करे। 

उसके वाद कोर्ट गवाही कराकर और मामले की पूर्ण रूप से जाॅच करने के वाद अगर अभियुक्त को दोषी पाती है तो ऐसे मे उस व्यक्ति को दो साल की सजा या चैक मे दी गई धनराशी की दोगुनी धनराशी तक का जुर्माना हो सकता है।

इस तरह के अपराध कम्पाउन्डवल अपराध होते है यानि यदि केस फाइल होने के वाद भी यदि पार्टी आपस मे फेसला कर पैसा प्राप्त कर लेती है तो भी केस को समाप्त कर दिया जाता है। 

आपको इस पोस्ट किसी लगी Dishonour of cheque | Cheque Bounce reasons हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताये साथ ही अगर आप कुछ पूछना या बताना चाहते हो तो भी हमें अपनी राय अवश्य बताये।

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