Succession Certificate Immovable Property in Hindi

Succession Certificate Immovable Property in Hindi

दोस्तो आज हम वात करेंगे उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र यानी Succession Certificate Immovable Property in Hindi की आज हम जानेगे की,

उत्तराधिकार प्रमाणपत्र का उपयोग मृतक के ऋण प्रतिभूतियों और अन्य परिसंपत्तियों पर उत्तराधिकारियों को अधिकार देने के लिए किया जाता है।
 
यह अदालत द्वारा दिया गया एक प्रमाण पत्र है जो आमतौर पर वारिसों की जांच से पहले होता है यह पता लगाने के लिए आवश्यक है।
 
कि मृतक के कानूनी उत्तराधिकारी कौन हैं। आम तौर पर एक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र में मृतक का विवरण कानूनी वारिस का विवरण चुना जाता है।
 
मृतक और उत्तराधिकारी के बीच संबंध ऋण और संपत्ति की सूची प्राधिकरण का अनुदान मृतक की मृत्यु का विवरण और एक घोषणा। 

What is Succession Certificate in Hindi

जो लोग अपनी संपत्ति प्रतिभूतियों और ऋणों को छोड़ते हुए अंत में मर जाते हैं उनके लिए अदालत हस्तक्षेप करती है।
 
ताकि वह मृत व्यक्ति के कानूनी उत्तराधिकारियों को उत्तराधिकार का प्रमाण पत्र प्रदान कर सके।
 
यदि कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति और संपत्ति के वितरण के संबंध में एक वसीयत तैयार किए बिना मृत हो गया है तो उस व्यक्ति की मृत्यु हो गई है। 
 
इसलिए एक आंतों की मृत्यु की ऐसी स्थिति में एक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र ऋण और प्रतिभूतियों का निपटान करने और मृत व्यक्ति की शेष संपत्ति को संभालने के लिए प्रमाण पत्र धारक को सूचित करता है।
 
प्रतिभूतियों और परिसंपत्तियों के लिए पात्रता के अलावा एक उत्तराधिकार प्रमाण पत्र भी सभी व्यक्तियों को ऐसे ऋणों के कारण क्षतिपूर्ति प्रदान करता है या ऐसी प्रतिभूतियों पर उत्तरदायी होता है।
 
जिनके साथ किए गए सभी भुगतानों या लेनदेन के संबंध में किसी व्यक्ति के साथ अच्छा विश्वास था जिसे प्रमाण पत्र प्रदान किया गया था।
 
उत्तराधिकार प्रमाण-प़त्र Succession Certificate Immovable Property in Hindi की जरूरत तव हो जाती है जव किसी व्यक्ति की मृत्यु ऐसी स्थति मे हो जाती है।
 
कि वह अपनी अचल सम्पत्ती के सम्बन्ध मे काई वसीयत कर कर न गया हो।  यानी वह अपनी मुवेवल प्रापर्टी के सम्बन्ध मे किसी को नौमनी वना कर न गया हो ये अचल सम्पत्ति जैसे -:
  1. वैक मे जमा पैसा
  2. फिक्स डिपोजिट
  3.  म्यूचल फण्ड
  4.  शेयर
  5.  डिवेंचरस

और कई प्रकार के निवेश के रूप मे हो सकती है। असल मे उत्तराधिकार प्रमाण-प़त्र यह वताता है कि जिस व्यक्ति की मृत्यू हुई है। 

आप उसके वास्तविक उत्तराधिकारी है। और उनके मरने के वाद उनकी सम्पत्ति पर आप मालिकाना हक रखते है। 

जव ऐसी स्थति मे कि मरने वाले का पैसा वैंक मे जमा हो। तव वैक इस वात से श्योर  होने के लिए कि मरने वाले का पैसा जिस व्यक्ति को दिया जा रहा है।

वह उसका वास्तविक उत्तराधिकारी है भी या नही उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र की मॉग करती है। 
 
आम तौर पर चल संपत्तियों में मृतक की संपत्ति पर स्वामित्व स्थापित करने के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं होती है। 
 
यह आम तौर पर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जब कोई अन्य कानूनी उत्तराधिकारी कानूनी उत्तराधिकारी के स्वामित्व और कब्जे का विरोध करता है जिसके कब्जे में यह जारी है। 
 
 
वैकल्पिक रूप से यह आवश्यक होगा यदि मामला अदालत में जाता है। अचल संपत्तियों के मामले में,
 
हालांकि उत्तराधिकारी प्रमाणपत्र संपत्ति के प्रशासन या बिक्री के लिए आवश्यक होगा भले ही उस पर कोई अन्य दावा न हो।
 

Succession Certificate Full Process in Hindi 

 
उत्तराधिकार का प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया के लिए एक व्यक्ति को सही क्षेत्राधिकार के जिला न्यायाधीश के समक्ष याचिका करने की आवश्यकता होती है। 
 
न्यायालय का अधिकार क्षेत्र मृतक के निवास स्थान या उस स्थान पर तय किया जाना चाहिए जहां प्रश्न में उक्त संपत्ति पूरी तरह या आंशिक रूप से स्थित हैए जैसा कि मामला हो सकता है।
 
उत्तराधिकार प्रमाणपत्र के लिए एक याचिका में आम तौर पर निम्नलिखित विवरण शामिल होने चाहिए।

  1.  मृतक की मृत्यु का समयय
  2.  मृत्यु के समय मृतक की संपत्तियों का निवास या विवरणए जिसके भीतर न्याय क्षेत्राधिकार हैय
  3.  परिवार या अन्य रिश्तेदारों के पास का विवरणय
  4.  मृतक की संपत्ति पर याचिकाकर्ता के अधिकारय
  5.  एक प्रमाण पत्र के अनुदान के लिए किसी भी बाधा की अनुपस्थितिय
  6.  सर्टिफिकेट का अनुदान
याचिका दायर किए जाने के बाद यह जिला न्यायाधीश पर निर्भर है कि वह याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर देना चाहता है।
 
या उसे दायर की गई याचिका की खूबियों के आधार पर मौखिक प्रस्तुतियाँ द्वारा अपना अधिकार स्थापित करने की अनुमति देता है। 
 
एक बार सभी सुनवाईए जैसा कि जिला जज द्वारा निर्देशित किया जाता हैए निष्कर्ष निकाला जाता हैए जज याचिकाकर्ता के उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्रदान करने के अधिकार का फैसला कर सकते हैं।
 
जब न्यायाधीश उत्तराधिकार प्रमाण-प़त्र जारी करने के लिए एक आदेश पारित करेंगे जिसमें में ऋण और प्रतिभूतियों को निर्दिष्ट किया जाएगा।
 
जो व्यक्ति को ब्याज या लाभांश प्राप्त करने या बातचीत करने या स्थानांतरित करने या दोनों करने के लिए सशक्त बनाता है।

प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए मृतक के कानूनी उत्तराधिकारियों को संपत्ति या उचित अधिकार क्षेत्र के जिला या उच्च न्यायालय में संपत्ति के लिए अपना दावा याचिका दायर करनी चाहिए।
 
हलफनामे में याचिकाकर्ता को राशन कार्ड के अपने पासपोर्ट की प्रतियां जमा करने की भी आवश्यकता है। हलफनामे में निम्नलिखित विवरण भी शामिल होंगे।

  1.     याचिकाकर्ता का नामय
  2.     निवास की जगहय तथा
  3.     याचिकाकर्ताओं का कब्जा 
उपरोक्त विवरण मृतक के परिजनों के लिए भी प्रदान किया जाना है। यदि कोई कानूनी उत्तराधिकारी संपत्ति के अपने अधिकार को त्यागना चाहता है तो यह स्पष्ट रूप से हलफनामे में उल्लेख किया जाना चाहिए। 
 
एक बार जब याचिकाकर्ताओं द्वारा अदालत के सामने हलफनामा दायर किया जाता है तो अदालत मृतक के सभी परिजनों को आवेदन का नोटिस देगी।
 
जानकारी के लिए एक राष्ट्रीय दैनिक में विज्ञापन के माध्यम से जानकारी को सार्वजनिक करने की आवश्यकता हो सकती है।
 
निर्धारित समय अवधि में यदि प्रमाण पत्र के अनुदान पर कोई आपत्ति अगले या परिजन या बड़े पैमाने पर जनता द्वारा नहीं उठाई जाती है।
 
तो प्रमाण पत्र जल्द ही जारी किया जाएगा। आमतौर पर उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के मामले में निर्णय के लिए लगभग चार महीने लगते हैं।

Succession Certificate Document Required in Hindi

उत्तराधिकार प्रमाण.पत्र को वनवाने के लिए Documents मे आपको मरने वाले का मृत्यू प्रमाण.पत्र और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के यहॉ से वना हुआ एक नौरमल उत्तराधिकार प्रमाण.पत्र दाखिल करना होता है। 

यह प्रमाण पत्र सिर्फ 5000 रू तक की वैल्यू Value तक की सम्पत्ति के लिए ही वैलिड Valid होता है इससे अधिक राशी के लिए आप को सिविल कोर्ट Civil Court से प्रमाण पत्र वनवाना होता है।

इसके साथ जिस व्यक्ति के द्वारा उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र  Succession Certificate Immovable Property in Hindi वनवाया जा रहा है उस व्यक्ति का आधार कार्ड भी आप को दाखिल करना होता है ।

  1. मृत्यू प्रमाण-पत्र 
  2. डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किया गया Certificate
  3. आधार कार्ड

तो दोस्तो उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र वनवाने के लिए जिस व्यक्ति की मत्यु हुई है वो जहॉ सामान्यतः निवास करता था या जहॉ वह सम्पत्ति है। 

जिसके सम्बन्ध मे आप उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र वनवाना चाहते है।

वहॉ के सिविल कोर्ट मे उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र Succession Certificate Immovable Property in Hindi वनवाने के लिए सवसे पहले एक एपलीकेशन फाइल की जाती है।

इस एपलीकेशन मे मरने वाले का नाम पता मरने वाले से आप का सम्बन्ध मृत्यु का समय दिनांक मृत्यु का स्थान,

और जो व्यक्ति उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र वनवाना चाहता है। उसका नाम व पूरा पता सारे विवरण आप को अपनी एपलीकेशन मे देना होता है।

इसके साथ ही आप को उन सभी सम्पत्तियो का पूरा विवरण अपनी ऐपलीकेशन मे देना होता है जिनके सम्वन्ध मे आप उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र वनवाना चाहते है।

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इसी के साथ-साथ एपलीकेशन मे मरने वाने व्यक्ति के सभी उत्तराधिकारियो का नाम पता व आदि विवरण भी आप को अपनी एपलीकेशन मे देना होता है ।

जव इस प्रकार एपलीकेशन कोर्ट को प्राप्त हो जाती है तो कोर्ट मरने वाले के सभी उत्तराधिकारियो को नोटिस भेजता है और इसी के साथ गजट कराता है। 

यानी कार्ट समाचार पत्र मे इस वात का विज्ञापन देता है कि मिस्टर A की सम्पत्ति के सम्वन्ध मे मिस्टर B के द्वारा कोर्ट मे उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र वनवाने के लिए एपलीकेशन फाइल की गई है। 

अगर किसी व्यक्ति को कोई आपत्ति है तो कोर्ट मे आकर अपनी इस प्रकार की आपत्ति को प्रस्तूत करे। 

अगर इस तरह गजट कराने के 45 दिन के वाद भी यदि कोर्ट को कोई आपत्ति प्राप्त नही होती है।

तो कोर्ट इस प्रकार आवश्यक जॉच करने के वाद और आवश्यक कोर्ट फीस लेने के वाद उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र जारी कर देता है।

Court Fees For Succession Certificate

उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र Succession Certificate Immovable Property in Hindi के सम्बन्ध मे जो कोर्ट फीस कोर्ट मे जमा करानी होती है।

वह मरने वाले की सम्पत्ति के आधार पर कोर्ट द्वारा जमा कराई जाती है। 

उदाहरण के लिए 

जैसे मान लीजिए की मरने वाले की जिन सम्पत्तियो के सम्बन्ध मे आप उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र  वनवाना चाहते है उसकी वैल्यू 10 लाख रुपये है। 

तो कोर्ट मे जो कोर्ट फीस जमा करानी होगी वह कोर्ट फीस एक्ट के आधार पर 10 लाख रुपये पर देनी होगी यदि वैल्यू इससे कुछ कम है। 

तो आप को उतनी ही वैल्यू पर कोर्ट फीस कोर्ट मे जमा करानी होती है यह कोर्ट फीस आपको कोर्ट मे जुडीशियल स्टाम्प पेपर के रूप मे जमा करानी होती है।

जव कोर्ट इस तरह की सारी जॉच कर लेती है और कोर्ट फीस प्राप्त कर लेती है तव कोर्ट उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र जारी कर देती है। 

अव यहॉ वात आती है कि क्या कोर्ट जारी किये हुए प्रमाण पत्र को निरस्त यानी रद्द भी कर सकती है यदि किसी स्थति मे कोर्ट को यह मालूम हो जाता है। 

कि उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र कोर्ट मे गलत दस्तावेज पेश कर कर या गलत साक्ष्य प्रस्तुत करके प्राप्त कर लिया गया है।

तो कोर्ट इस प्रकार जारी किये गये प्रमाण पत्र को निरस्त भी कर सकती है।

अव एक वात और आती है मान लीजिए की किसी व्यक्ति द्वारा कोर्ट मे पेश की गई के विरूध कोई आपत्ति आ जाती है तव कोर्ट क्या करता है। 

तो जव इस तरह एपलीकेशन के खिलाफ कोर्ट मे कोई आपत्ति आ जाती है।

तो कोर्ट ऐसी एपलीकेशन को प्रोपर मुकदमे की तरह सुनना शुरू कर देती है दोनो पक्षो की गवाही कराती है। 

और फिर सारी वातो पर विस्तार से विचार करने के वाद जो उसका वास्तविक हकदार होता है उसके पक्ष मे उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र Succession Certificate जारी कर देती है। 

यदि काई आपत्ति प्रस्तुत न की जाए तो इस प्रकार कार्ट से लगभग 6 से 7 महीने मे प्रमाण प़त्र जारी हो जाता है और यदि आपत्ति आ जाती है तो इसमे 1 से 2 साल का समय भी लग जाता है। 

तो दोस्तो मुझे लगता है कि आप उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र Succession Certificate Immovable Property in Hindi का सारा प्रोंशेश समझ गये होगे।  धन्यवाद।

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