बरिष्ट नागरिको के कानूनी अधिकार

बरिष्ट नागरिको के कानूनी अधिकार

भारत के सबिंधान ने देश के सभी नागिरको को समान अधिकार दिए है सम्मान और न्याय पूर्वक जीवन जीने का हक़ सभी को हमारे सबिंधान ने दिया है। 

भारतीय न्यायपालिका देश के नागरिको को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिवद्ध है लेकिन कई बार जानकारी न होने के कारण लोगो को न्याय से बंचित रहना पढता है। 

आर्थिक रूप से पिछड़ा वर्ग न्यायालय के दरवाजे तक जाने से भी कतराता है ऐसे लोगो तक न्याय की पहुंच बड़ाई जा सके उन्हें उनके अधिकार मिल सके। बरिष्ट नागरिको के कानूनी अधिकार

इसके लिए सरकार मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करती है ठीक़ इसी तरह ज्ञानी लॉ भी आपको आपके कानून व् अधिकारों से रूबरू कराने का प्रयास करता है। 

तो चलिए जानते है की क्या है आपके अधिकार, कैसे पा सकते है आप न्याय, और आपकी मदद के लिए सरकार ने क्या क्या प्रावधान किये है। 

आज हम बात करेंगे समाज के उस वर्ग की जिनको अपनों ने ही दर्द दिया उम्र का बो पड़ाव जब एक व्यक्ति को प्यार, सम्मान और सेवा की अत्यधिक आवश्यकता होती है। 

तब अपनों ने ही उनकी उपेक्षा की देश के बुजुर्गो को कभी भाबनात्मक स्तर पर तो कभी शारीरिक तौर पर या कभी संपत्ति के लिए प्रताड़ित किया जाता है। 

लेकिन देश का कानून हमारे बुजुर्गो की सुरक्षा और अधिकार देने के लिए परिपूर्ण है। जरुरत है तो आपके जागरूक होने की इसलिए आज हम बात करने जा रहे है बरिष्ट नागरिको के कानूनी अधिकार के  बारें में।

हमारे कानून में वरिष्ठ नागरिको को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कई प्रकार के कानून बनाये है साथ ही केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने कई गाइडलाइन्स भी जारी की है। 

केंद्र सरकार ने 2007 में एक एक्ट पास किया जिसे हम मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ़ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन्स एक्ट के नाम से जानते है। 

 इस एक्ट के तहत सरकार के मुख्य उद्देश्य यह थे -

  1. जो माता-पिता और बुजुर्ग स्वयं को मेंटेन करने में असमर्थ है बह अपने बच्चो यानि अपने बेटे या पोते-पोतियो से अपनी सेवा का हक़ ले सके यानि उनसे मेंटिनेंस प्राप्त कर सकें। 
  2. दूसरा उद्देश्य यह था की जो माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक है उनको अच्छी और बेहतर मेडिकल सुविधाएं प्राप्त हो सकें। 
  3. तीसरा उद्देश्य यह था की अगर किसी माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक के जीवन को कोई खतरा है या उनकी संपत्ति को कोई खतरा है तो बह कानूनी मदद ले सकें तथा अपने आप को व् अपनी संपत्ति को प्रोटेक्ट कर सकें। 
  4. इसी के साथ केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने भी सभी राज्यों को यह निर्देश देते हुए कहा कि हर जिले में कम से कम एक (ओल्ड ऐज होम) यानि बृद्धाश्रम का निर्माण होना चाहिए ताकि जो बुजुर्ग माता-पिता या वरिष्ठ नागरिक है बह वहां जा सके और अपनी इक्षा अनुशार रह सकें।

अब बात करते है सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिको को क्या क्या फायदे या कहें तो छूट प्रदान की गयी है। तो सरकार द्वारा बरिष्ट नागरिको कई तरह की राहत प्रदान की है।

जैसे आयकर विभाग में छूट, रेल यात्रा करने पर टिकिट में छूट, साथ ही हेल्थ इन्शुरन्स में छूट प्रदान की है।

यह सारी सुबिधाये एक वरिष्ठ नागरिक चाहे तो बह प्राप्त कर सकते है और अगर बह नहीं चाहते है तो बह इन सुविधाओं को लेने से मना भी कर सकते है। 

वरिष्ठ नागरिक के लिए छूट

  1. अगर किसी वरिष्ठ नागरिक की आय सालाना 3 लाख तक या उससे कम है तो उन नागरिको से इनकम टैक्स नहीं बसूला जायेगा यानि अगर आपकी आय 3 लाख से कम है तो आपको इनकम टैक्स नहीं देना है। 
  2. इसी के साथ अगर कोई वरिष्ठ नागरिक रेल की यात्रा करते है तो  टिकट है उस पर एक वरिष्ठ नागरिक को 40 से 50 % प्रतिशत तक की छूट का प्रावधान है लेकिन यह उस वरिष्ठ नागरिको पर निर्भर करता है कि बह इस डिस्काउंट यानि छूट को प्राप्त करें या नहीं। 
  3. अगर कोई वरिष्ठ नागरिक किसी भी बैंक, अस्पताल या किसी भी दफ्तर में जाते है या रेलवे टिकट के लिए वरिष्ठ नागरिको के लिए एक अगल लाइन होगी ऐसा मैं नहीं सरकार कहती है और अगर ऐसा नहीं  होता है तो आप बहा के अधिकारी से शिकायत कर ऐसा करा सकते है। 
  4. इसी के साथ साथ सरकार ने वरिष्ठ नागरिको को हेल्थ इन्शुरन्स में भी कुछ छूट प्रदान की है।
  5. इसी के साथ ने सरकार ने वरिष्ठ  नागरिको के लिए पेंसन की कई स्कीम भी निकाली हैं जिसका लाभ काफी वरिष्ठ नागरिक ले रहें है। आप पेंशन से सम्बंधित कोई भी सबाल या शिकायत https://pensionersportal.gov.in/ पर कर सकते है।

अब बात करते है वरिष्ठ नागरिको के अधिकारों के बारें में कई बार देखा जाता है की बूढ़े माँ-बाप अपनी संपत्ति बच्चो के नाम कर देते है और बाद में बच्चे माँ बाप को शारीरिक और मानशिक प्रताड़ित करते है।

यहाँ तक उन्हें घर से निकाल दिया जाता है या उन्हें वृद्धश्रम में छोड़ दिया जाता है ऐसे में उन माता पिता को या ऐसे वरिष्ठ नागरिको को यह पता होना आवश्यक है। 

कि क्या है उनके अधिकार ताकि अगर बह ऐसी समस्या से जूझ रहें है तो बह अपने  अधिकारों के चलते अपना हक प्राप्त कर सकें तो चलिए जानते है। 

बरिष्ट नागरिको के 10 कानूनी अधिकार

  1. सुरक्षा का अधिकार - इस अधिकार के अंतर्गत किसी भी बुजुर्ग या वरिष्ठ नागरिक को कोई भी व्यक्ति चाहे बह घर का हो या बाहर का बेटा, बेटी, दामाद कोई भी सदस्य किसी भी तरह से वरिष्ठ नागरिक को प्रताड़ित नहीं कर सकता, और अगर कोई भी व्यक्ति ऐसा करता है तो बह वरिष्ठ नागरिक का यह अधिकार है, कि बह ऐसे व्यक्ति की तुरंत जिलाअधिकारी के दफ्तर जाकर शिकायत करे और अगर बह जिलाअधिकारी के पास जाने में असमर्थ है तो अपने निकटम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा सकता है। कानून के मुताबिक पुलिस को 24 घंटे में केस दर्ज करना होगा और जिला अधिकारी को 30 दिनों के अंदर शिकायत का निबटारा करना होगा। 
  2. भरण पोषण का अधिकार - इस कानून में वरिष्ठ  नागरिको की देखभाल यानि उनके भरण पोषण का भी प्रावधान है अगर कोई बुजुर्ग परिवार के साथ परिवार से दूर या फिर अकेला रहता है और बह वरिष्ठ नागरिक अपना गुजारा करने में असमर्थ है तो कानून के मुताबिक बो वरिष्ठ नागरिक अपने विवाहित या अविवाहित बेटा या बेटी या करीबी रिस्तेदार से 10000 दस हजार रूपये पर महीने अपने भरण पोषण हेतु प्राप्त कर सकता है यहाँ करीबी रिस्तेदार से मतलब उस सक्श से है जो बेटा या बेटी न होने पर उस वरिष्ठ अधिकारी की जायजात का वारिश होगा। 
  3. अगर वेटा या बेटी या संपत्ति का वारिश भरण-पोषण नहीं देता है तो उस पर 5000 तक का जुरमाना या 3 माह का कारावास या दोनों हो सकते है। इसी के साथ अगर बेटा या बेटी भरण पोषण देने में असमर्थ है तो यह वरिष्ठ नागरिक कोर्ट पर निर्भर करता है कि बह क्या फेशला ले। 
  4. संपत्ति का अधिकार -यह कानून बरिष्ट नागरिको को उनके संपत्ति पर उनका उचित हक़ दिलाने के लिए है अगर कोई संपत्ति किसी बुजर्ग के नाम है तो बह जब तक जीवित है बह उसके हक़दार है अगर उनकी संपत्ति से बेटा या बेटी या कोई और सक्श उन्हें निकलता है तो बह नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवा सकते है। 
  5. इसी के साथ वरिष्ठ नागरिक चाहे तो अपनी संपत्ति किसी को भी दे सकते है जरूरी नहीं कि बह अपने बेटी या बेटे की ही नाम उस संपत्ति  को करें बह चाहे तो बह अपनी संपत्ति किसी भी व्यक्ति या संसथान को अपनी मर्जी से अपनी सम्प्पति दे सकते है, और यह आपका अधिकार है। 
  6. इसी के साथ अगर किसी वरिष्ठ नागरिक ने अपनी संपत्ति अपने बेटे या बेटी के नाम कर दी और बाद में बेटा या बेटी ऐसे वरिष्ठ नागरिक की देखभाल नहीं करते तो बह अपनी संपत्ति को बापस भी ले सकते है। इसी के साथ कोई झूट बोल कर सम्प्पति अपने नाम करा ले तब भी बह चाहे तो उस रजिस्टर्ड दस्तबेजो को ख़ारिज करा अपनी संपत्ति बपास ले सकते है। 
  7. यह कानून वरिष्ठ नागरिको को फ्री वकील की सुविधा भी प्रदान करता है अगर किसी बुजुर्ग की आय 2 लाख रूपये सालाना या उससे कम है तो सरकार उन्हें केस लड़ने के लिए मुफ्त वकील मुहैया कराया जाता है, अगर कसी बुजुर्ग के पास 2 लाख की आय का सबूत नहीं है तो उन्हें DLSA यानि डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस ऑथोरिटी के ऑफिस में 10 रूपये के स्टाम्प पेपर पर एफिडेबिट बनबना होगा जिसपे उन्हें यह दर्शाना होगा की उनकी आय सालाना 2 लाख से कम है। 
  8. इसी के साथ भारतीय सरकार ने वरिष्ठ नागरिको  के लिए एक हेल्पलाइन नम्बर - 1291  जारी किया है ताकि वरिष्ठ नागरिको को होने वाली परेशानियों का समाधान किया जा सके। 
  9. इसी के कोई भी बुजुर्ग महिला जो कि घरेलु हिंसा का शिकार है बह बुजुर्ग कोम्प्लैंट नंबर - 181 पे अपनी शिकायत दर्ज करवा सकतीं है।
  10. इसी के साथ  असम सरकार ने 2007 में एक कानून पारित किया था जिसके तहत अगर कोई व्यक्ति जो अपने माता-पिता को घर से निकल देता है और ऐसा करता पाया जाता है तो उसकी सैलिरी में से कुछ सैलिरी काट कर उनके माता-पिता के खाते में ट्रांफर की जाएगी और साथ ही ऐसे व्यक्ति पर 5000 तक का जुर्माना और साथ ही 3 महीने की जेल का भी प्रावधान है लेकिन यह कानून सिर्फ असम राज्य में ही लागू है।

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