अनिल त्रिपाठी बनाम सरत कमार पण्डा एवं अन्य

(उच्चतम न्यायालय)
सिविल अपील संख्या 7397 वर्ष 2018 
31 जुलाई 2018 को विनिश्चित

अनिल त्रिपाठी
बनाम
सरत कमार पण्डा एवं अन्य

 निर्णय 

कुरियन जोसेफ न्यायमूर्ति - अनुमति प्रदान की गयी।

2. अपीलार्थी ने आर० एफ० ए० संख्या 199 वर्ष 2013 में उड़ीसा उच्च न्यायालयए कटक द्वारा पारित किये गये दिनांक 11/7/2014 के निर्णय एवं आदेश के द्वारा व्यथित होकर इस न्यायालय के समक्ष उपागम किया था। प्रथम अपील हक वाद संख्या 380 वर्ष 2001 में विद्वान अपर जिला न्यायाधीश द्रुतगामी न्यायालय भुवनेश्वर के द्वारा पारित किये गये दिनांक 19/11/2003 के निर्णय से उद्भूत हुई थी। हक वाद में एक प्रारम्भिक डिक्री पारित की गयी थी जिसने अपील को उद्धृत किया था। अपील को अनुज्ञात किया गया था और इस प्रकार वादी इस न्यायालय के समक्ष है।

3. जब मामला इस न्यायालय के समक्ष आया था यह पाते हुये कि समझौते का एक तत्व है इस न्यायालय ने 16/3/2018 को निम्नलिखित आदेश पारित किया था :

              "न्यायालय के द्वारा किये गये सझाव पर दोनों पक्षकारों के विद्वान अधिवक्ता ने यह निवेदन किया था कि वे पक्षकारों के बीच समझौते को निस्तारित करने की संभावना को तलाशेंगे यदि मामला माध्यस्थम के समक्ष निर्दिष्ट किया जाता है।

         तद्नुसार हम पक्षकारों के बीच विवाद के सौहार्दपूर्ण समझौते की सम्भावना तलाशने के लिये उड़ीसा उच्च न्यायालय कटक से संलग्न माध्यस्थम केन्द्र के समक्ष निर्दिष्ट करते हैं जो 7/4/2018 को 11:00 बजे पूर्वाह्न उक्त माध्यस्थम केन्द्र के समक्ष उपस्थित होंगे।

भारसाधक माध्यस्थम केन्द्र विवाद के सौहार्दपर्वक समझौते का प्रयत्न करने के पश्चात इस न्यायालय के समक्ष उसके पश्चात् चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। माध्यस्थम रिपोर्ट प्राप्त करने के पश्चात् मामले को सूचीबद्ध किया जाये।

Anil Tripathy vs Sarat kumar Panda judgment hindi

4. उसके पश्चात् यह रिपोर्ट दी गयी थी कि पक्षकारगण ने सिद्धान्तः विवाद को निस्तारित करने का निर्णय लिया है। तथापि वे निबन्धनों पर सहमत होने में समर्थ नहीं थे। जब मामला 6/7/2018 को इस न्यायालय के समक्ष आया था तब चूंकि पक्षकारगण हमारे समक्ष थे इसलिये हम समझौते को अग्रसारित कर सके थे और निबन्धनों को अन्तिम रूप दे सके थे। वादी ने वादग्रस्त भूमि को ₹2,500 (दो हजार पांच सौ रुपये) प्रति वर्ग फीट की दर पर धनराशि पर क्रय करने के लिये करार किया था, फिर भी स्थिति के बारे में विवाद था। इस प्रकार 11/7/2018 को इस न्यायालय ने निम्नलिखित आदेश पारित किया था ।

       "पक्षकारों ने सिद्धान्तः अपने बीच शान्ति बनाये रखने की सहमति की है। याची वादग्रस्त भूमि के। सम्बन्ध में ₹ 2,500 प्रति वर्ग फीट की दर पर संदत्त करने के लिये सहमत है। तथापि इसके बारे में कुछ विवाद प्रतीत होता है कि वादग्रस्त भूमि की वास्तविक स्थिति क्या है।

हम सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण भवनेश्वर को पक्षकारों के साथ जाने और वास्तविक भमि को सीमांकित करने का निर्देश देते हैं। यह अमीन के द्वारा तैयार किये जाने के लिये कहे गये मानचित्र को भी निर्दिष्ट करेगा। पक्षकारगण 16/7/2018 को 11:00 बजे पूर्वाह्न सचिव के समक्ष उपस्थित होंगे और सचिव स्थानीय निरीक्षण करेगा और उसके पश्चात् एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

मामला 26ण्7ण्2018 तक स्थगित किया जाता है।

5. श्री मानस रंजन राय, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खुर्दा भवनेश्वर ने दिनांक 28/7/2018 की एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है जिसमें यह कहा गया है कि भूमि की वास्तविक सीमा को वेतनभोगी अमीन की सहायता से निर्धारित किया गया है। मापा गया क्षेत्रफल 440.82 वर्ग फीट है। आरेख भी भेजा गया है। रिपोर्ट तथा आरेख इस निर्णय का भाग गठित करेंगे। इसलिये अपील को पक्षकारों के बीच यथा व्यवस्थित तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा प्रस्तुत की गयी रिपोर्ट के निबन्धनों में निवास किया जाता है। हम श्री मानस रंजन राय सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा किये गये मदत प्रयत्नों के लिये अपनी सराहना अभिलिखित करते हैं।

6. समझौता के निबन्धनों में वादी को तीन द्विविमासिक किश्तों में धनराशि को संदत्त करने के लिये निर्देशित किया जाता है। पहली किश्त आज से एक माह के भीतर संदत्त की जायेगी। हम सक्षम प्राधिकारी पूर्ण संदाय किये जाने के पश्चात् अधिकार अभिलेख को परिवर्तित करने का निर्देश देते हैं। यदि वादी अन्तरण का पृथक् दस्तावेज चाहता है हम प्रत्युत्तरदातागण को वादी के व्यय पर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश देते हैं।

7.विद्वान वरिष्ठ अधिवक्ता श्री इन्दिरा जयसिंह ने विनम्रतापूर्वक यह निवेदन किया है कि वर्तमान में प्रत्युत्तरदातागण की सम्पत्ति से होकर जाने वाली भूमिगत पानी की पाइपलाइन को वादी की सम्पत्ति में स्थानान्तरित किया जा सकता है। हम दोनों पक्षकारों को स्थानान्तरण की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिये अपना सहयोग प्रदान करने के लिये निर्देशित करते हैं। कोई व्यय नहीं

नोट : [ ज्ञानी लॉ द्वारा उक्त आदेशो का हिंदी रूपांतरण सिर्फ जन-सामान्य व् अधिवक्ता गणों को हिंदी में उक्त आदेशों को समझने हेतु प्रस्तुत किये जातें है इनका प्रयोग किसी भी विधिक कार्यवाही में करना त्रुटिपूर्ण होगा ]

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