अधिवक्ताओं के अधिकार एवं विशेष छूट | Rights of advocates and Special Exemptions

एल० एल० बी० की 3 साल या 5 साल की डिग्री पास करने के बाद बकालत पेशे से जुड़े वकीलों को अधिवक्ता अधिनियम 1961 में कुछ विशेष अधिकार और गिरफ़्तारी में छूट जैसी कुछ महत्वपूर्ण छूटे प्रदान की है।

अगर आप एक अधिवक्ता है या एल० एल० बी० कर रहे है तो आपको अधिवक्ता अधिनियम 1961 में अधिवक्ताओ के लिए दिए गए विशेष अधिकार और छूट के बारें में ज्ञान होना आवश्यक है।

हेलो दोस्तों मेरा नाम है नमन भरद्वाज और आप पड़ना सुरु कर चुके है ज्ञानी लॉ तो चलिए आज के इस लेख को शुरू करते है और जानते है कि आखिर कौन कौन से अधिकार एक अधिवक्ता को प्राप्त है।

अधिवक्ताओं के अधिकार | Rights of Advocates in Hindi

  1. अधिवक्ताओं को अभ्यास का अधिकार (Right to Practice)
  2. प्री-ऑडियंस का अधिकार (Right to Pre-Audience)
  3. गिरफ़्तारी में छूट 
  4. जेल में कैदी से मिलने का अधिकार
  5.  संचार की गोपनीयता
वकालत पेशे से जुड़े अधिवक्ताओ को जो अधिकार और छूट प्रदान की गयीं है बह अधिवक्ता अधिनियम 1961 में बतायीं गयी हैं जो कि निम्न प्रकार हैं :-
 
1. अधिवक्ताओं को अभ्यास का अधिकार - अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 30 के अंतर्गत विशिष्ट सुरक्षा प्रदान की गयी है धारा 30 के मुताबिक जो व्यक्ति स्टेट बार कॉउन्सिल में पंजीकृत है

 उसे भारत के किसी कोर्ट या ट्रिब्यूनल में एक अधिवक्ता के रूप में अभ्यास यानि प्रैक्टिस करने का अधिकार दिया गया है।

 इसमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है परन्तु नए नियमो के अनुशार यदि स्टेट बार कॉउन्सिल में पंजीकृत करने बाले अधिवक्ता ने एल० एल० बी० की डिग्री 2010 या 2010 के बाद प्राप्त की है। 
 
तो ऐसे लॉयर को बार कॉउन्सिल ऑफ़ इंडिया द्वारा आयोजित आल इंडियन बार एग्जाम को पास करना अनिवार्य होगा 
 
अथवा उस अधिवक्ता का राइट टू प्रैक्टिस का अधिकार बापस ले लिया जायेगा। और ऐसे व्यक्तियों को अधिवक्ताओ की श्रेणी में नहीं रखा जायेगा। 

Right to Pre-Audience in hindi

2. प्री-ऑडियंस का अधिकार - दूसरा और महत्वपूर्ण अधिकार है Right to Pre-Audience जो अधिकवता अधिनियम की धारा 23 के अंतर्गत एक अधिवक्ता को यह अधिकार प्रदान करता है। 

कि धारा 23 के आधार पर एक अधिवक्ता को किसी भी व्यक्ति की तुलना में पहले सुने जाने का अधिकार दिया गया है। 
 
और न्यायालय में अधिवक्ता द्वारा अपने क्लाइंट के पक्ष में अपनी बात रखने का और अपनी बात रखते समय कोई अन्य व्यक्ति द्वारा उसमे बाधा नहीं डाल सकता।
 
जब तक कि अधिवक्ता अपनी बात को पूरी तरह न्यायालय में रख न दे।  लेकिन अधिवक्ता द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। 
 
साथ ही अधिवक्ता अधिनियम की धारा 23 के अनुशार अधिवक्ता को न्यायालय द्वारा अधिवक्ता को पहले सुना जाये।
 
इसका भी विवरण दिया गया है। अब बात करते है कि एक अधिवक्ता के लिए कौन कौन सी छूटें प्रदान की गयीं है। 
 

अधिवक्ताओं के लिए छूट | Exemptions for advocates in Hindi

 
3. गिरफ़्तारी में छूट - सबसे पहले बात करें तो गिरफ़्तारी में छूट एक अधिवक्ता को सिविल मुकदमो में गिरफ़्तारी में छूट प्रदान की गयी है। 
 
यह छूट सिविल प्रक्रिया सहिंता 1908  की धारा 135 के अंतर्गत दी प्रदान की गयी है इसके अनुसार एक अधिवक्ता जब न्यायालय में या ट्रिब्यूनल में भाग लेने जा रहा हो या न्यायालय से बापिस आरहा हो। 
 
तो ऐसे अधिवक्ता को किसी भी सिविल मुकदमे में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है लेकिन यह सुरक्षा क्रिमिनल ऑफेन्स या न्यायालय की अबमानना में उपलब्ध नहीं है। 
 
4. जेल में कैदी से मिलने का अधिकार - दूसरी जो छूट अधिवक्ताओ को प्रदान की गयी है बह यह कि कैदी से मिलने का अधिकार बैसे जेल के नियमो के अनुशार सप्ताह में दो दिन मंगलवार और गुरूवार दो दिन ही कैदी से मिलने या कहें तो मिलाई के दिन तय किये गए है। 
 
कोई भी व्यक्ति किसी कैदी से इन दो दिनों के भीतर ही मुलाकात कर सकता है परन्तु अधिवक्ताओ के लिए ऐसा नहीं है उनके यह छूट प्रदान की गयी है। 
 
कि बह जब चाहें और जितनी बार चाहें, अपने कैदी यानि अपने क्लाइंट से मिल सकते है जेल का यह नियम अधिवक्ताओ पर प्रभावी नहीं है। 
 
5. संचार की गोपनीयता - आखिरी और महत्वपूर्ण छूट जो प्रदान की गयी है वो आपको इंडियन एविडेन्स एक्ट 1872 की धारा 126  के अंतर्गत पेशेबर रोजगार के उद्देश्य के लिए अधिवक्ताओ और ग्राहक के बीच किये गए संचार का खुलासा करने की अनुमति नहीं है। 

तो ये थे कुछ अधिवक्ताओं के अधिकार एवं विशेष छूट | Rights of advocates and Special Exemptions आशा करते है आपको ये लेख पसंद आया होगा धन्यवाद !
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